डंकन मैक डॉगल ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि आत्मा का वजन 21 ग्राम होता है।
इंसान जन्म लेता है और उसकी मृत्यु भी निश्चित है। मौत किसी की भी जिंदगी का सबसे बड़ा सच होता है जिसे कोई भी टाल नहीं सकता है।
शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि आत्मा अमर है। वह एक शरीर से निकलकर दूसरे शरीर को धारण करती है। अब जैसे हम किसी भारी-भरकम कपड़े या जूते को उतारकर जब अपना वजन नापते हैं तो उसमें कुछ अंतर आता है तो क्या जब इंसान की मौत हो जाती है तो आत्मा के निकल जाने से बॉडी वेट में कुछ अंतर आता है?
इसी बात का पता लगाने के लिए 10 अप्रैल 1901 को अमरीका के डॉर्चेस्टर में एक प्रयोग किया गया। डॉ. डंकन मैक डॉगल ने अपने चार अन्य साथी डॉक्टर्स के साथ इस प्रयोग को किया था।
Soul
इस एक्सपेरीमेंट में ऐसे 5 पुरुष और एक महिला मरीज को लिया गया जिनकी हालत काफी नाजुक थी। मौत से पहले मरीजों की बेहद सावधानी से वजन लिया गया। इनको खासतौर पर डिजाइन किए गए फेयरबैंक्स वेट स्केल पर रखा गया था। जैसे ही मरीज की जान गई वेइंग स्केल की बीम नीचे गिर गई। इससे पता चला कि उसका वजन करीब तीन चौथाई आउंस कम हो गया है।
ऐसा अन्य तीन मरीजों के साथ भी हुआ। हालांकि बाद में मशीन के खराब हो जाने के कारण बाकी दो को टेस्ट नहीं किया जा सका। इससे साबित हो गया कि हमारी आत्मा का वजन 21 ग्राम है। इससे एक बात तो साबित हो चुका कि शरीर में अंगों के साथ-साथ आत्मा का भी वजन होता है।


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